एरिक एरिक्सन (Erik Erikson) का सिद्धांत भी समाजीकरण को समझाने के लिए एक महत्वपूर्ण और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसे मनोवैज्ञानिक विकास का सिद्धांत (Psychosocial Development Theory) कहा जाता है। एरिकसन का सिद्धांत बताता है कि व्यक्ति का व्यक्तित्व और सामाजिक पहचान जीवन के विभिन्न चरणों में विकसित होती है। उन्होंने जीवन को आठ चरणों में विभाजित किया, और हर चरण में व्यक्ति एक विशेष प्रकार के मनोवैज्ञानिक संघर्ष से गुजरता है।
एरिक एरिक्सन का मनोवैज्ञानिक विकास का सिद्धांत
एरिकसन के अनुसार, हर जीवन चरण में व्यक्ति एक चुनौती का सामना करता है, जिसे सफलतापूर्वक हल करने पर उसका व्यक्तित्व मजबूत और परिपक्व होता है। यदि ये संघर्ष सही से हल न हो पाए, तो व्यक्ति के सामाजिक और भावनात्मक विकास में बाधाएं आ सकती हैं।
यहाँ एरिकसन के आठ चरणों के साथ-साथ प्रत्येक चरण में उत्पन्न होने वाले गुणों का विवरण दिया गया है:
विश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs. Mistrust)
- आयु: जन्म से 1 वर्ष तक
- संघर्ष: इस चरण में शिशु अपनी देखभाल करने वालों पर निर्भर होता है। यदि उनकी ज़रूरतें पूरी होती हैं और वे प्यार तथा देखभाल पाते हैं, तो उनमें विश्वास विकसित होता है।
- गुण: आशा (Hope) – यदि बच्चा इस चरण में विश्वास विकसित करता है, तो वह भविष्य में आशावादी और आत्मविश्वासी बनेगा।
स्वायत्तता बनाम संदेह (Autonomy vs. Shame and Doubt)
- आयु: 1 से 3 वर्ष तक
- संघर्ष: इस चरण में बच्चे अपनी स्वतंत्रता का अनुभव करते हैं, जैसे कि चलना, बोलना और छोटे-छोटे निर्णय लेना।
- गुण: साहस (Will) – स्वतंत्रता का यह अनुभव बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करता है और उनके आत्म-विश्वास को बढ़ाता है।
उद्यम बनाम अपराधबोध (Initiative vs. Guilt)
- आयु: 3 से 6 वर्ष तक
- संघर्ष: इस चरण में बच्चे नई गतिविधियों में संलग्न होते हैं और अपने काम में पहल करना चाहते हैं।
- गुण: उद्देश्य (Purpose) – इस स्तर पर पहल करना सीखने से उनमें उद्देश्य की भावना पैदा होती है। उन्हें लगता है कि उनके प्रयास सार्थक हैं।
उद्योग बनाम हीनता (Industry vs. Inferiority)
- आयु: 6 से 12 वर्ष तक
- संघर्ष: इस चरण में बच्चे अपने स्कूल और अन्य कार्यों में कड़ी मेहनत करते हैं, जिससे उन्हें नए कौशल और क्षमताएं विकसित होती हैं।
- गुण: योग्यता (Competence) – इस चरण में सफलता का अनुभव करने से उनमें कार्य-कुशलता और योग्यता की भावना विकसित होती है।
पहचान बनाम भ्रम (Identity vs. Role Confusion)
- आयु: 12 से 18 वर्ष तक (किशोरावस्था)
- संघर्ष: इस चरण में किशोर अपने व्यक्तित्व को समझने और समाज में अपनी भूमिका का पता लगाने की कोशिश करते हैं।
- गुण: निष्ठा (Fidelity) – अपनी पहचान की खोज के बाद, उनमें अपने सिद्धांतों और आदर्शों के प्रति निष्ठा का भाव उत्पन्न होता है।
संबंध बनाम एकाकीपन (Intimacy vs. Isolation)
- आयु: 18 से 40 वर्ष तक (प्रौढ़ता की शुरुआत)
- संघर्ष: इस चरण में व्यक्ति घनिष्ठ संबंध और मित्रता स्थापित करने का प्रयास करता है।
- गुण: प्रेम (Love) – इस चरण में सफल होने पर व्यक्ति घनिष्ठ और सार्थक रिश्तों को विकसित करता है, जिससे प्रेम की भावना बढ़ती है।
उत्पादकता बनाम ठहराव (Generativity vs. Stagnation)
- आयु: 40 से 65 वर्ष तक (मध्य वयस्कता)
- संघर्ष: इस चरण में व्यक्ति अपने परिवार, समाज और भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुछ सार्थक योगदान करने का प्रयास करता है।
- गुण: देखभाल (Care) – उत्पादकता की भावना से व्यक्ति अपने समाज और अगली पीढ़ी के प्रति देखभाल का भाव विकसित करता है।
अखंडता बनाम निराशा (Integrity vs. Despair)
- आयु: 65 वर्ष और उससे ऊपर (बुढ़ापा)
- संघर्ष: इस अंतिम चरण में व्यक्ति अपने जीवन का अवलोकन करता है और अपने जीवन की घटनाओं को मूल्यांकन करता है।
- गुण: मूल्यांकन (Wisdom) – यदि व्यक्ति अपने जीवन को संतोषजनक मानता है, तो उसमें संतोष और परिपक्वता का भाव उत्पन्न होता है, जिसे "विस्डम" कहते हैं।
अब मैं आपको एरिक एरिक्सन के मनोवैज्ञानिक विकास के सिद्धांत के आठ चरणों के साथ कुछ उदाहरण (examples) भी देता हूँ, ताकि आप इसे बेहतर तरीके से समझ सकें।
1. विश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs. Mistrust)
उदाहरण:
- एक नवजात बच्चा, जो पूरी तरह से अपनी माँ या पिता पर निर्भर होता है, उन्हें प्यार और देखभाल मिलती है, तो वह विश्वास विकसित करता है।
- अगर बच्चे को ठीक से देखभाल नहीं मिलती, या उसे अकेला छोड़ दिया जाता है, तो वह अविश्वास और असुरक्षा महसूस करता है।
उदाहरण:
- अगर एक शिशु की माँ हमेशा उसके पास रहती है, उसे दूध देती है, तो बच्चा विश्वास करेगा कि उसे हमेशा सुरक्षा मिलेगी। लेकिन अगर माँ कभी अनुपस्थित रहती है और बच्चे को चुपचाप छोड़ देती है, तो बच्चा असुरक्षित महसूस करेगा और उसमें अविश्वास पैदा होगा।
2. स्वायत्तता बनाम संदेह (Autonomy vs. Shame and Doubt)
उदाहरण:
- 2 साल का बच्चा जो खुद से कपड़े पहनने की कोशिश करता है और उसे सफलता मिलती है, तो उसमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।
- लेकिन यदि उसे गलतियों पर डांट पड़ी, या उसने कुछ गड़बड़ किया, तो उसे संकोच और संदेह हो सकता है।
उदाहरण:
- एक बच्चा जब अपनी माँ से कहता है, "मैं खुद से खा सकता हूँ," और माँ उसे स्वतंत्र रूप से खाने देती है, तो बच्चे को आत्मविश्वास मिलेगा। अगर उसे लगातार यह कहकर रोका जाए कि "तुम नहीं कर सकते," तो वह संदेह महसूस करेगा।
3. प्रयास बनाम अपराधबोध (Initiative vs. Guilt)
उदाहरण:
- 4-5 साल का बच्चा जो अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक खेल योजना बनाता है, तो वह प्रयास की भावना महसूस करता है।
- यदि बच्चे को अपराधबोध का सामना करना पड़े, जैसे कोई गलती करना और उसे इसके लिए डांटना, तो वह अपराधबोध महसूस कर सकता है।
उदाहरण:
- बच्चा जब खेल में नई योजना लाता है, जैसे "आओ हम सब मिलकर एक घर बनाएं," और बच्चे को यह विचार अच्छा लगता है, तो वह प्रयास करेगा। अगर उसे डांटा जाता है, तो उसे अपराधबोध हो सकता है कि शायद उसने कुछ गलत किया।
4. उद्योग बनाम हीनता (Industry vs. Inferiority)
उदाहरण:
- एक बच्चा जब स्कूल में अच्छे अंक प्राप्त करता है, या किसी गतिविधि में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसे उद्योग की भावना मिलती है।
- लेकिन यदि उसे लगातार असफलता का सामना करना पड़े और उसके प्रयासों को कमतर समझा जाए, तो उसे हीनता का अहसास हो सकता है।
उदाहरण:
- एक बच्चा जो क्लास में अच्छे अंक लाता है और शिक्षक उसकी तारीफ करते हैं, उसे आत्म-सम्मान मिलता है। लेकिन अगर बच्चा लगातार असफल होता है और उसे कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उसे हीनता का अहसास हो सकता है।
5. पहचान बनाम भूमिका भ्रम (Identity vs. Role Confusion)
उदाहरण:
- किशोरावस्था के दौरान व्यक्ति अपने आत्म-बोध को समझने की कोशिश करता है। अगर उसे सामाजिक समूहों में पहचान मिलती है, तो वह अपनी भूमिका जानता है।
- लेकिन अगर वह अपने बारे में उलझन महसूस करता है, तो भूमिका भ्रम का शिकार हो सकता है।
उदाहरण:
- एक किशोर जो खेल, पढ़ाई, या कला में अच्छा प्रदर्शन करता है, उसे अपनी पहचान मिलती है। अगर वही किशोर किसी गहरे संकट से गुजरता है, जैसे कि दोस्तों से दूरी या परिवार में विवाद, तो उसे अपनी भूमिका को लेकर भ्रम हो सकता है।
6. संबंध बनाम अलगाव (Intimacy vs. Isolation)
उदाहरण:
- एक युवा व्यक्ति जो गहरे और स्थिर संबंध बनाता है, जैसे किसी प्रेम संबंध या दोस्ती, तो उसे संबंध की संतुष्टि मिलती है।
- लेकिन यदि वह अकेला रहता है और किसी से गहरा संबंध नहीं बना पाता, तो उसे अलगाव का अनुभव हो सकता है।
उदाहरण:
- एक युवक जो अपने दोस्त से गहरी दोस्ती करता है और किसी प्रेमी या प्रेमिका के साथ रिश्ता बनाता है, तो उसे संबंध की पूर्ति मिलती है। लेकिन अगर वह खुद को अकेला महसूस करता है और किसी के साथ भावनात्मक संबंध नहीं बना पाता, तो वह अलगाव महसूस कर सकता है।
7. उत्पादकता बनाम ठहराव (Generativity vs. Stagnation)
उदाहरण:
- एक व्यक्ति जो अपने परिवार, समुदाय या पेशे में सक्रिय रूप से योगदान देता है, जैसे कि बच्चों की देखभाल करना, समाज की सेवा करना, तो वह उत्पादकता की भावना अनुभव करता है।
- लेकिन यदि वह अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होता और समाज में योगदान नहीं देता, तो उसे ठहराव का अनुभव हो सकता है।
उदाहरण:
- एक व्यक्ति जो अपना समय समाज की भलाई के लिए समर्पित करता है, जैसे कि वॉलंटियर कार्य या बच्चों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम चलाना, उसे उत्पादकता का अहसास होता है। यदि वह अपने कार्यों से संतुष्ट नहीं होता और खुद को बेकार महसूस करता है, तो वह ठहराव का अनुभव कर सकता है।
8. सम्पूर्णता बनाम निराशा (Integrity vs. Despair)
उदाहरण:
- जब एक वृद्ध व्यक्ति अपने जीवन की उपलब्धियों पर विचार करता है और उन्हें संतोषजनक पाता है, तो उसे जीवन की सम्पूर्णता का अहसास होता है।
- लेकिन अगर वह अपने जीवन से असंतुष्ट रहता है और पछताता है, तो वह निराशा महसूस करता है।
उदाहरण:
- एक वृद्ध व्यक्ति जो अपने परिवार, दोस्तों, और कार्यों से संतुष्ट है, और अपने जीवन को सफल मानता है, उसे सम्पूर्णता का अनुभव होता है। लेकिन अगर वही व्यक्ति अपने जीवन से असंतुष्ट रहता है और पछताता है, तो वह निराशा का अनुभव कर सकता है।
निष्कर्ष
इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि एरिक एरिक्सन का मनोवैज्ञानिक विकास का सिद्धांत यह बताता है कि जीवन के प्रत्येक चरण में व्यक्ति एक महत्वपूर्ण सामाजिक और मानसिक संघर्ष से गुजरता है, जो उसके सामाजिकरण और व्यक्तित्व के विकास में मदद करता है। समाज में व्यक्ति का स्थान और उसकी पहचान इन संघर्षों के माध्यम से बनती है।
👨⚕️ Erik Erikson (1902–1994)
जर्मन-अमेरिकी मनोविश्लेषक
उन्होंने Freud के सिद्धांत को आगे बढ़ाया लेकिन केवल "जैविक" नहीं, बल्कि "सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अनुभवों" को जोड़कर एक नया सिद्धांत प्रस्तुत किया
इसे कहा जाता है: Psychosocial Development Theory
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📊 8 Stages of Psychosocial Development
> Erikson ने मानव विकास को 8 चरणों में बाँटा, जो जन्म से बुढ़ापे तक चलते हैं।
हर चरण में व्यक्ति को एक मनोसामाजिक द्वंद्व (conflict) का सामना करना पड़ता है।
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🧒 1. Trust vs. Mistrust (0–1.5 वर्ष)
विशेषता विवरण
यदि बच्चा माता-पिता से सुरक्षा और प्यार पाता है → Trust विकसित होता है
यदि उपेक्षा या अस्थिरता मिले → Mistrust
📌 गुण जो विकसित होता है: Hope (आशा)
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👶 2. Autonomy vs. Shame/Doubt (1.5–3 वर्ष)
विवरण
बच्चा खुद करने की कोशिश करता है (चलना, खाना)
यदि उसे प्रोत्साहन मिला → स्वायत्तता (Autonomy)
यदि बार-बार टोका गया या शर्मिंदा किया गया → Shame/Doubt
📌 गुण: Will (इच्छाशक्ति)
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🧒 3. Initiative vs. Guilt (3–6 वर्ष)
विवरण
बच्चा योजना बनाता है, खेल करता है, नई चीजें शुरू करता है
सफलता → Initiative (पहल)
बार-बार टोकना, दंड → Guilt (अपराध भावना)
📌 गुण: Purpose (उद्देश्य)
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🧑🎓 4. Industry vs. Inferiority (6–12 वर्ष)
विवरण
स्कूल का समय: बच्चा सीखता है, सहयोग करता है
प्रशंसा → Industry (परिश्रम, सफलता)
आलोचना, असफलता → Inferiority (हीन भावना)
📌 गुण: Competence (योग्यता)
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🧑 5. Identity vs. Role Confusion (12–18 वर्ष)
विवरण
किशोरावस्था: "मैं कौन हूँ?" का उत्तर खोजता है
आत्म-समझ → Identity (पहचान)
भ्रम और दबाव → Role Confusion
📌 गुण: Fidelity (निष्ठा, वफ़ादारी)
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🧑🤝🧑 6. Intimacy vs. Isolation (18–25 वर्ष)
विवरण
करीबी संबंधों की तलाश
सच्चे रिश्ते → Intimacy
संबंधों से दूरी → Isolation
📌 गुण: Love (प्रेम)
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🧑💼 7. Generativity vs. Stagnation (25–60 वर्ष)
विवरण
परिवार, समाज, बच्चों और काम में योगदान
यदि रचनात्मक रहें → Generativity (उत्पादकता)
अगर खुद तक सीमित रहे → Stagnation (ठहराव)
📌 गुण: Care (देखभाल)
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👴 8. Ego Integrity vs. Despair (60+ वर्ष)
विवरण
जीवन की समीक्षा करता है
संतोष → Ego Integrity (आत्म-सम्मान)
पछतावा → Despair (निराशा)
📌 गुण: Wisdom (बुद्धिमत्ता)
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🔁 सारणी (Summary Table)
चरण आयु द्वंद्व गुण
1️⃣ 0–1.5 Trust vs Mistrust Hope
2️⃣ 1.5–3 Autonomy vs Shame Will
3️⃣ 3–6 Initiative vs Guilt Purpose
4️⃣ 6–12 Industry vs Inferiority Competence
5️⃣ 12–18 Identity vs Role Confusion Fidelity
6️⃣ 18–25 Intimacy vs Isolation Love
7️⃣ 25–60 Generativity vs Stagnation Care
8️⃣ 60+ Ego Integrity vs Despair Wisdom
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📚 शिक्षा में उपयोग (Use in Education):
शिक्षक को यह समझना चाहिए कि हर आयु में बच्चे की विशिष्ट सामाजिक और भावनात्मक जरूरतें होती हैं
बच्चों को सकारात्मक अनुभव देने से मनोसामाजिक विकास में मदद मिलती है
यदि किसी चरण में द्वंद्व का समाधान सही न हो → अगला चरण प्रभावित होता है
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📝 CTET / HTET संभावित प्रश्न:
1. Erikson के सिद्धांत में कितने चरण हैं?
➤ 8
2. 'Identity vs Role Confusion' किस आयु से संबंधित है?
➤ किशोरावस्था (12–18 वर्ष)
3. ‘Hope’ किस चरण का गुण है?
➤ Trust vs Mistrust
4. ‘Industry vs Inferiority’ किससे जुड़ा है?
➤ स्कूल उम्र
5. Erikson की थ्योरी का नाम क्या है?
➤ Psychosocial Development Theory
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📘 निष्कर्ष (Conclusion):
✅ Erikson ने बताया कि मनुष्य का विकास केवल शारीरिक या संज्ञानात्मक नहीं, बल्कि "सामाजिक अनुभवों से प्रभावित मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया" भी है।
✅ हर चरण में व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों से जूझकर एक नया गुण प्राप्त करना होता है।

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