"I" और "Me" का सिद्धांत George Herbert Mead द्वारा प्रस्तुत किया गया था। यह सिद्धांत व्यक्ति के आत्म-बोध (self) और उसकी सामाजिक पहचान को समझने में मदद करता है। Mead ने आत्म-बोध के दो हिस्सों का वर्णन किया है: "I" और "Me"। दोनों का समाज के साथ हमारे संबंध और हमारे आत्म-प्रकटीकरण में महत्वपूर्ण योगदान होता है।

"I" और "Me" का सिद्धांत George Herbert Mead 


"I" और "Me" का अर्थ

  1. "I" (मैं):

    • "I" का हिस्सा हमारे व्यक्तित्व का वह पहलू है, जो स्वतंत्र और स्वायत्त है। यह समाज के नियमों और मानदंडों से परे है, और यह हमारी व्यक्तिगत इच्छाओं, भावनाओं और अनूठे कार्यों को दर्शाता है।
    • "I" वह है जो समाज के प्रभाव से परे होकर अपनी खुद की इच्छाओं और निर्णयों के अनुसार कार्य करता है। यह हमारे अंदर की रचनात्मकता, स्वत:स्फूर्तता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को दर्शाता है।
    • उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति किसी जोखिम भरे या रचनात्मक कार्य को करता है, जैसे नई कला का निर्माण करना या अनोखे विचार प्रस्तुत करना, तो यह उनके "I" का हिस्सा है।
  2. "Me" (मुझ):

    • "Me" आत्म का वह हिस्सा है, जो समाज द्वारा आकार लिया गया है। यह उस तरीके को दर्शाता है, जिसमें हम समाज के नियमों, मानदंडों और दूसरों की अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार करते हैं।
    • "Me" हमारी सामाजिक पहचान और संस्कृति द्वारा बनाए गए नियमों और अपेक्षाओं का परिणाम है। यह वह हिस्सा है जो सोचता है, "लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे?" या "मुझे समाज में स्वीकार करने के लिए कैसे व्यवहार करना चाहिए?"
    • उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति समाज के नियमों और अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार करता है, जैसे कि सार्वजनिक स्थानों पर विनम्रता दिखाना या अपने काम पर समय पर पहुंचना, तो यह उनके "Me" का हिस्सा है।

"I" और "Me" के बीच अंतर

विशेषताI (मैं)Me (मुझ)
प्रकृतिस्वतंत्र, रचनात्मक, व्यक्तिगतसमाज द्वारा नियंत्रित, दूसरों के दृष्टिकोण से प्रभावित
संबंधव्यक्तिगत इच्छाएँ और स्वायत्ततासमाज, संस्कृति और नियमों से जुड़ा हुआ
प्रतिक्रियास्वत:स्फूर्त प्रतिक्रियासोच-समझ कर प्रतिक्रिया देने वाला
उदाहरणकोई नई कला या विचार प्रस्तुत करनासमाज के नियमों का पालन करना

उदाहरण से समझना:

  • एक व्यक्ति एक सार्वजनिक सभा में एक नई और विवादास्पद राय रखता है। यहां उसका "I" उसे अपनी राय व्यक्त करने और कुछ अलग करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
  • वहीं, वह यह भी सोचता है कि उसके परिवार या समाज में लोग उसके विचारों के बारे में क्या सोचेंगे। यह उसके "Me" का प्रभाव है, जो समाज की अपेक्षाओं और नियमों के अनुसार सोच रहा है।

निष्कर्ष

"I" और "Me" मिलकर एक संतुलन बनाते हैं, जिससे व्यक्ति एक सामाजिक रूप से स्वीकृत लेकिन व्यक्तिगत रूप से संतुष्ट व्यक्तित्व का निर्माण करता है। "I" हमारी पहचान को अद्वितीय और अनोखा बनाता है, जबकि "Me" हमें समाज में स्वीकार्यता दिलाता है। दोनों का तालमेल ही हमारी पूरी व्यक्तित्व को परिभाषित करता है।