📘 Jean Piaget की Moral Development Theory (नैतिक विकास सिद्धांत)
👨🏫 परिचय (Introduction)
Piaget ने यह सिद्धांत 1932 में अपनी पुस्तक "The Moral Judgment of the Child" में प्रस्तुत किया। यह बताता है कि बच्चे कैसे सही और गलत के बीच भेद करना सीखते हैं।
🔍 मूल आधार (Basic Concept)
Piaget के अनुसार, नैतिक विकास दो प्रमुख स्तरों में होता है:
🔷 1. Heteronomous Morality (पराधीन नैतिकता)
- 📅 आयु: 5 से 10 वर्ष तक
- 📌 नियम को अपरिवर्तनीय (fixed) माना जाता है
- 📌 बच्चा सोचता है कि नियम भगवान, माता-पिता या शिक्षक द्वारा बनाए गए हैं
- 📌 नियम तोड़ना = सजा तय
- 📌 परिणाम (consequences) के आधार पर निर्णय होता है, मंशा (intentions) नहीं देखी जाती
- 📌 इसे "Moral Realism" भी कहते हैं
उदाहरण: अगर दो बच्चे गलती करते हैं और एक से ज़्यादा प्लेट टूटती है, तो बच्चा उसी को बड़ा अपराधी मानेगा भले ही वह गलती से टूटी हो।
🔷 2. Autonomous Morality (स्वतंत्र नैतिकता)
- 📅 आयु: 10 वर्ष के बाद
- 📌 नियम को समझदारी से देखा जाता है और बदला भी जा सकता है
- 📌 मंशा और उद्देश्य को प्राथमिकता दी जाती है
- 📌 न्याय, सहयोग, समानता को महत्व
- 📌 निर्णय लेते समय परिप्रेक्ष्य और परिस्थिति को देखा जाता है
- 📌 इसे "Moral Relativism" भी कहते हैं
उदाहरण: यदि एक बच्चा जानबूझकर एक प्लेट तोड़ता है और दूसरा गलती से पाँच प्लेट तोड़ता है, तो बच्चा कहेगा जानबूझकर तोड़ना गलत है — यानी अब वह मंशा को देखता है।
📋 तुलना सारणी:
| बिंदु | Heteronomous Morality | Autonomous Morality |
|---|---|---|
| 📅 आयु | 5–10 वर्ष | 10 वर्ष से ऊपर |
| 📜 नियम | ईश्वर/बड़ों द्वारा तय | पारस्परिक सहमति से बदल सकते हैं |
| ⚖️ निर्णय | परिणाम आधारित | मंशा आधारित |
| 👀 दृष्टिकोण | एकपक्षीय (बड़ों की बात) | सहयोगात्मक (दोनों पक्षों को देखना) |
| 📌 सिद्धांत | Moral Realism | Moral Relativism |
🧠 नैतिक विकास में भूमिका निभाने वाले कारक:
| कारक | विवरण |
|---|---|
| ✅ सामाजिक अनुभव | अन्य बच्चों से संपर्क |
| ✅ खेल | नियमों को समझने में मदद |
| ✅ माता-पिता की भूमिका | न्याय, दया और सहिष्णुता सिखाना |
| ✅ संज्ञानात्मक परिपक्वता | सोचने की क्षमता में विकास |
📘 Piaget की Constructivist Theory (निर्माणवादी अधिगम सिद्धांत)
👨🏫 Jean Piaget का निर्माणवाद (Constructivism)
Constructivism एक शिक्षण-सिद्धांत है, जो मानता है कि:
"बच्चे ज्ञान को स्वयं बनाते हैं, ना कि दूसरों से सीधा प्राप्त करते हैं।"
Jean Piaget के अनुसार, ज्ञान निर्माण एक सक्रिय और आत्म-निर्माण की प्रक्रिया है।
🎯 मुख्य धारणा (Core Idea):
Children are not passive receivers of information, but active participants who construct knowledge through experience.
🧱 Constructivist Learning के मूल तत्व:
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| 🧠 Active Learning | विद्यार्थी पढ़ाई में स्वयं भाग लेता है, केवल सुनने तक सीमित नहीं। |
| 🔄 Schema | मानसिक ढाँचा जिसमें नया ज्ञान जोड़ा जाता है। |
| ➕ Assimilation | नई जानकारी को पुराने ज्ञान में शामिल करना |
| 🛠 Accommodation | पुराने ज्ञान को नई जानकारी के अनुसार ढालना |
| ⚖️ Equilibration | समावेशन और अनुकूलन के बीच संतुलन बनाए रखना |
| 🧪 Discovery Learning | बच्चा स्वयं सीखता है – प्रयोग, समस्या समाधान, सवाल पूछकर |
| 👫 Social Interaction | साथी बच्चों से बातचीत और विचार-विमर्श से नया ज्ञान बनता है |
📚 शिक्षण में निर्माणवाद की भूमिका:
| शिक्षक की भूमिका | विद्यार्थी की भूमिका |
|---|---|
| मार्गदर्शक (Facilitator) | खोजकर्ता (Explorer) |
| प्रोत्साहन देने वाला | प्रश्न पूछने वाला |
| अनुभव देने वाला | अनुभव से सीखने वाला |
| वातावरण बनाने वाला | स्वयं से सक्रिय भागीदारी |
🔎 उदाहरण:
बच्चा "गोल" और "लंबा" गिलास देखता है और सोचता है कि लंबे में पानी ज्यादा है। जब शिक्षक प्रयोग कराता है और दोनों में समान पानी दिखाता है, तब बच्चा स्वयं समझता है कि ऊँचाई से मात्रा नहीं बदलती — यही है निर्माणवाद।
📋 Piaget के Constructivism की विशेषताएँ:
- ✅ बच्चा स्वयं ज्ञान बनाता है
- ✅ विकासात्मक अवस्था के अनुसार अधिगम होता है
- ✅ गलतियाँ सीखने का हिस्सा हैं
- ✅ सीखना एक प्रक्रिया है, उत्पाद नहीं
- ✅ प्राकृतिक जिज्ञासा अधिगम की कुंजी है
🏫 निर्माणवाद आधारित शिक्षण रणनीतियाँ:
- 1. Problem-solving activities
- 2. Project-based learning
- 3. Hands-on activities / experiments
- 4. Group discussion / peer interaction
- 5. Reflective thinking (चिंतन आधारित सीख)
- 6. Concept Mapping / Mind Maps
- 7. Role play, dramatization
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