कोयला और चंदन | संगति का जीवन पर प्रभाव
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| कोयला और चंदन से मिली जीवन की अमूल्य सीख |
चौधरी पहलवान का पूरा जीवन जरूरतमंदों की सहायता और समाज को शिक्षा देने में समर्पित रहा। यह प्रेरणादायक कथा हमें बताती है कि अच्छी और बुरी संगति हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है।
जब चौधरी पहलवान का अंतिम समय नजदीक आया, तो उन्होंने अपने बेटे को पास बुलाया। बेटा पास आया तो उन्होंने कहा —
“बेटा, मैंने अपना सारा जीवन लोगों को शिक्षा देने में बिताया है। अब अंतिम समय में मैं तुम्हें जीवन की एक जरूरी सीख देना चाहता हूँ। लेकिन उससे पहले तुम एक कोयले का टुकड़ा और चंदन की लकड़ी ले आओ।”
बेटे को यह बात अटपटी लगी, लेकिन पिता की आज्ञा मानते हुए वह रसोई से कोयले का एक टुकड़ा उठा लाया। संयोग से घर में चंदन की एक छोटी लकड़ी भी मिल गई। वह दोनों चीजें लेकर अपने पिता के पास पहुँच गया।
पिता बोले — “अब इन दोनों चीजों को नीचे फेंक दो।”
बेटे ने दोनों चीजें नीचे फेंक दीं और हाथ धोने जाने लगा, तभी पिता ने उसे रोकते हुए कहा — “जरा ठहरो बेटा, अपने हाथ तो दिखाओ।”
पिता ने बेटे का कोयले वाला हाथ पकड़कर कहा —
“देखा तुमने? कोयला पकड़ते ही हाथ काला हो गया। और फेंक देने के बाद भी कालिख हाथ में लगी रह गई।”
उन्होंने समझाया कि गलत लोगों की संगति भी बिल्कुल कोयले जैसी होती है। उनके साथ रहने पर भी दुख मिलता है, और उनका साथ छूटने के बाद भी बदनामी जीवन भर साथ रहती है।
फिर उन्होंने चंदन की लकड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा —
सज्जनों का संग चंदन की तरह होता है। उनके साथ रहते हैं तो ज्ञान, संस्कार और सकारात्मकता मिलती है, और उनका साथ छूटने के बाद भी उनके विचारों की सुगंध जीवन भर बनी रहती है।
🌿 जीवन संदेश
जीवन हमारा है, और सज्जन या दुर्जन का चुनाव भी पूरी तरह हमारा ही निर्णय है।
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Tags: प्रेरणादायक कथा, नैतिक शिक्षा, अच्छी संगति, जीवन संदेश

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