अजगर करै न चाकरी – संत मलूकदास की प्रेरक कथा
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| संत मलूकदास की प्रसिद्ध कथा – अजगर करै न चाकरी, जो सिखाती है कि सबके दाता भगवान राम हैं। |
भारतीय संत परंपरा में संत मलूकदास का नाम विशेष श्रद्धा से लिया जाता है। उनकी रचनाएं और कथाएं ईश्वर पर अटूट विश्वास का संदेश देती हैं। “अजगर करै न चाकरी” कथा इसी विश्वास की अद्भुत मिसाल है।
शुरू में संत मलूकदास नास्तिक थे, यानी ईश्वर के होने में उनका कोई विश्वास नहीं था। उन्हीं दिनों उनके गांव में एक साधु आकर ठहर गया। प्रतिदिन गांव वाले साधु से रामायण सुनने जाते थे।
एक दिन मलूकदास भी रामायण सुनने पहुंचे। साधु महाराज राम की महिमा बताते हुए कह रहे थे कि राम दुनिया के सबसे बड़े दाता हैं — वे भूखों को अन्न, नंगों को वस्त्र और आश्रयहीनों को आश्रय देते हैं।
यह बात मलूकदास के गले नहीं उतरी। उन्होंने पूछा, “यदि मैं चुपचाप बैठकर राम का नाम लूं और कोई काम न करूं, तो क्या राम मुझे भोजन देंगे?”
साधु ने उत्तर दिया, “अवश्य देंगे।”
मलूकदास ने फिर पूछा, “यदि मैं घने जंगल में अकेला बैठ जाऊं, तब भी?”
साधु महाराज ने दृढ़ता से कहा, “तब भी राम भोजन देंगे।”
यह सुनकर मलूकदास सीधे जंगल पहुंचे और एक ऊँचे पेड़ पर चढ़कर बैठ गए। चारों ओर घना जंगल, कांटेदार झाड़ियाँ और सन्नाटा था।
रात हो गई, लेकिन न भोजन मिला और न ही वे पेड़ से उतरे। दूसरे दिन दोपहर में घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई दी। कुछ राजकीय अधिकारी वहां आए और पेड़ के नीचे भोजन निकालने ही वाले थे कि अचानक शेर की भयानक दहाड़ सुनाई दी।
डर के मारे अधिकारी भोजन वहीं छोड़कर भाग गए। मलूकदास यह सब ऊपर से देख रहे थे। शेर दूसरी ओर चला गया।
मलूकदास को विश्वास हो गया कि यह सब राम की कृपा है, पर वे अभी भी पेड़ से नीचे नहीं उतरे।
कुछ समय बाद डाकुओं का एक दल वहां पहुंचा। चमकदार बर्तनों में रखा भोजन देखकर वे रुक गए। डाकुओं ने पहले विष की शंका की और भोजन लाने वाले को खोजने लगे।
तभी उनकी नजर पेड़ पर बैठे मलूकदास पर पड़ी। डाकुओं ने छुरा दिखाकर उन्हें भोजन करने को मजबूर किया।
मलूकदास ने भोजन कर लिया और पूरी कहानी सुना दी। डाकुओं ने उन्हें छोड़ दिया। इस घटना के बाद मलूकदास ईश्वर के सच्चे भक्त बन गए।
कथा से सीख
यह कथा सिखाती है कि जब मनुष्य पूर्ण विश्वास और समर्पण करता है, तो भगवान स्वयं उसकी व्यवस्था करते हैं। तर्क और अहंकार छोड़कर भक्ति के मार्ग पर चलना ही सच्चा मार्ग है।
अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम,
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।

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