राजा अज और दशरथ का जन्म: एक प्रेरक कथा

राजा अज जंगल में सरोवर के पास खड़े हैं, सामने सुंदर कमल का फूल तैर रहा है, ब्राह्मण और ब्राह्मणी दूर किनारे पर देख रहे हैं - दशरथ जन्म कथा का दृश्य

राजा अज और सरोवर का कमल: यह दृश्य दशरथ के जन्म की प्रेरक कथा को दर्शाता है।


एक बार राजा अज जंगल में भ्रमण करने के लिए गए थे, तो उन्हें एक बहुत ही सुंदर सरोवर दिखाई दिया। उस सरोवर में एक कमल का फूल था जो अति सुंदर प्रतीत हो रहा था।

उस कमल को प्राप्त करने के लिए राजा अज सरोवर में चले गए, किंतु यह क्या! राजा अज जितना भी उस कमल के पास जाते, वह कमल उनसे उतना ही दूर हो जाता और राजा अज उस कमल को पकड़ नहीं पाए।

अंततः आकाशवाणी हुई: “हे राजन! आप नि:संतान हैं, आप इस कमल के योग्य नहीं हैं।” इस भविष्यवाणी ने राजा अज के हृदय में भयंकर घात किया था।

राजा अज अपने महल में लौट आए और चिंता ग्रस्त रहने लगे क्योंकि उन्हें संतान नहीं थी, जबकि वह भगवान शिव के परम भक्त थे।

भगवान शिव ने उनकी चिंता को ध्यान में लिया और धर्मराज को बुलाया। उन्होंने कहा: “तुम किसी ब्राह्मण को अयोध्या नगरी पहुँचाओ, जिससे राजा अज को संतान की प्राप्ति के आसार हों।”

दूर पार एक गरीब ब्राह्मण और ब्राह्मणी सरयू नदी के किनारे कुटिया बनाकर रहते थे। एक दिन वे ब्राह्मण राजा अज के दरबार में गए और अपनी दुर्दशा का जिक्र करते हुए भिक्षा मांगने लगे।

राजा अज ने अपने खजाने में से उन्हें सोने की अशर्फियां देने की कोशिश की, लेकिन ब्राह्मण ने मना कर दिया कि यह प्रजा का धन है। राजा अज ने अपने गले का हार भी देने की कोशिश की, पर ब्राह्मण ने उसे भी स्वीकार नहीं किया।

इस प्रकार राजा अज दुखी हुए कि एक गरीब ब्राह्मण उनके दरबार से खाली हाथ जा रहा है। शाम को राजा अज एक मजदूर का रूप लेकर नगर में निकल पड़े।

चलते-चलते वह एक लौहार के यहाँ पहुंचे और बिना परिचय के वहां काम करने लगे। पूरी रात उन्होंने लोहे पर हथौड़े से काम किया और सुबह एक टका कमाया।

राजा ने वह टका ब्राह्मण की पत्नी को दिया और कहा कि इसे ब्राह्मण को दे देना। ब्राह्मण ने टका जमीन पर फेंका, और वहां अचानक एक गड्ढा हो गया। जब ब्राह्मण ने खोदा, तो उसमें से सोने का एक रथ निकला, जो आसमान की ओर चला गया।

इसके बाद और रथ निकले — कुल नौ सोने के रथ आसमान की ओर गए। दसवाँ रथ निकला, जिसमें एक बालक था। वह रथ जमीन पर आकर ठहर गया।

ब्राह्मण ने वह बालक लेकर राजा अज के दरबार में पहुंचे और कहा: “राजन, इस पुत्र को स्वीकार कीजिए। यह आपका ही पुत्र है, जो एक टका से उत्पन्न हुआ है। इसके साथ में नौ सोने के रथ आसमान में चले गए, और यह बालक दसवें रथ पर निकला।”

इस प्रकार महाराज दशरथ का जन्म हुआ। उनका असली नाम मनु था, और वे दसों दिशाओं में अपना रथ लेकर जा सकते थे, इसलिए वे दशरथ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

🙏 इस प्रेरक कथा से हमें धर्म, भक्ति और संतान की महत्ता का ज्ञान मिलता है। 🙏